आँगन
मंहगाई, मेहरारु आ मोबाइल
हमार माई कबो - कबो एगो कहाउत कहेले कि चिरई के जान जाव लइका खेलउना. इहे हालत ऐ घरी हमार हो गइल बा. हम त केहूंग मंहगाई से लड़ि - लड़ि के आपन घर गिरस्थी के गाड़ी खींच रहल बानी आ रोज राति के एही नींदे सुतेनी कि भिनुसारे सुनाई दी कि मंहगाई कम हो गइल. बाकिर ई अइसन बेमारी हो गइल बा कि कम होखे के के कहो रोज बढ़ते जाता. काल्हे पईसा के ममिला वाला एगो नेता जी के कहनाम अखबार में पढ़नी कि दिसम्बर ले मंहगाई कम हो जाई माने गाछे कटहर ओठे तेल. हम त एही संसा में दुबराईल जाऽतानी आ हमार सग मेहरारु हमरा पीछे पड़ल बिआ कि मोबाइल के दाम कम हो गइल बा एगो हमरा खातिर कींन दीं. एकरे के नूं कहल जाला कि केहू के गोड़ में नइखे जुता आ केहूके गोदी में घूमे कुत्ता. बाकी फेर... - भोजपुरिया गुरु
गरमी के छुटटी में मौज मस्ती के तइयारी
साल भर जोहला के बाद पढ़े लिखे वाला लड़िकन के जब गरमी के छुटटी होला त ओकनी के मन में ऐने ओने घूमे खातिर एगो नया उमंग देखे के मिलेला. अइसना में लड़िकन के धधाइल देखत बनेला. कवनो के मन करेला कि कहीं पहाड़ पर घूमे जाईं त कवनो के मन करेला कि कहीं ठंडा जगही जाइल जाव त केहू अपना नानी किहां जाये खातिर मछियाला. बाकिर लड़िकन के जब ई मालूम होला कि जब ले गारजियन आ मतारी बाप ना चाही लोग तब ले कुछुओ ना होई त ओकनी के मन छोट हो जाला. जे लड़िकन के सेहत खातिर ठीक ना होला. एह सब से लड़िकन के सुबुक मन पर खराब असर पड़ेला. लड़िकन के मन में कुंठा घर क लेला. वइसे त इहो बात ठीक बा कि कि खाली लड़िकन के मन से मतारी बाप त ना नू चल सकेला. कहीं भीतर बाहर आवे जाये खातिर सब तरेह से सोचे के पड़ेला. एह मंहगाई के जमाना में खरचा वरचा आ इंतजाम बात पर विशेष धियान देवे के पड़ेला.
एही कुल्हि परेशानी से बचे खातिर सभसे नीमन त इहे होला कि गरमी के छुटटी होखे से पहिलहीं लईकन का साथे बइठ के कहीं घूमे फिरे के पोरगराम तय क लेवे के चाहीं. फेरु ओही पोरगराम के मोताबिक गाड़ी में रिजरवेशन करवा लेवे के चाहीं आ जहवां ठहरे के बा ओकरो बेवस्था पुख्ता क लेवे के चाहीं. एकाएकी पोरगराम बनवला से आवे जाये आ रुके ठहरे के दिक्कत के चलते मन खराब हो जाला.
एही से पहिलहीं से सभ कुछ तय करेके चाहीं आ पोरगराम तय करे के बेरा लडिकन के पसंद के खेयाल राखे के चाहीं कि लडिकन सन कहवां घूमे के चाहत बाङन स. जदी लडिकन के मन से परगराम बनेला त ओमे ओकनी के खुशी आ उतसाह त होइबे करेला आ लडिकनों के पूरा सहजोग मतारी बाप के मिलेला. अइसन क के रउवा भी ओकनी का आगे आपन बात राख सकेनी कि हम घूमे फिरे त चलतानी बाकिर ओजा उधम ना होखे के चाहीं. आउर अगिला कोर्स आ होमवर्क के किताब कापी साथे ले चले के पड़ी. अइसन कइला पर लड़िकनों के बात माने में कवनो परेशानी ना होला आ ऊ तुरते तइयार हो जाला कि पापा रउवा हमनी के घुमावे ले चलीं हमनी के आपन होमवर्क आ पढ़ाइयो ओजा क लेब सन. हँ रउरा एतना जरुर करे के पड़ी कि लड़िकन के किताब कापी बाकी सामान के साथे ले जाये के पड़ी.
जदि कवनो कारन से बाहर जाये के पोरगराम नइखे बनत त लड़िकन के पियार से समझावे के कोशिश करे के चाहीं. अइसन कइला से ओकनी के मन पर ठेस ना पहुँची.
एकरा अलावे भी जदी कहीं बाहर जाये के पलान नइखे बनत त गरमी के छुटटी में लड़िकन पर विशेस धियान देवे के चाहीं. ओकनी के बेमतलब घाम आ लूक में घूमे से मना करे के चाहीं. लड़िकन खातिर घरहीं में लूडो, कैरमबोर्ड, वीडियो गेम भा कम्प्यूटर गेम के इंतजाम क देवे के चाहीं. जदी लड़िकन के चाव किस्सा कहानी के किताब का ओर बा त ओकनी खातिर कामिक्स के बजाय बाल साहित्य, ग्यानवर्धक आ रोचक किताबन के बेवस्था क देवे के चाहीं. ई सभ कइला से लड़िकन सन भर घाम घूमला के बजाय घर में बइठ के आपन टाइम पास क लीहन स.
दोसर बात एगो आउर जे सभसे जरुरी ई बा कि लड़िकन के खानपान पर भी गरमी के दिन में बहुत धेयान देवे के चाहीं. लड़िकन के फास्ट फूड, अधिका तेल मसाला आ बरफ वाला चीज ना खाये देवे के चाहीं. एह तरीका से साल भर के पढ़ाई लिखाई के भार से दबल लड़िका स गरमी के छुटटी के मजा मस्ती से मिल सकेला. लड़िका स के मन एह उमंग से फेरु अगिला साल के पढ़ाई लिखाई खातिर दिमागी तौर से तइयार रहेला जे लड़िकन के सेहत के दिसाई ठीक होला.