मेहनत पर विश्वास कइल जरुरी बा-ओ.पी.चौबे

एक्लेट टाइल्स क्वालिटी के नाम ह.

कहल जाला कि जदी आदमी मन आ लगन से मेहनत करे त ओकर बढ़िया फल जरुर मिलेला . ठीक इहे कहनाम बा एक्लेट टाइल्स के मालिक श्री ओ.पी.चौबे के. चौबे जी कहेनी कि आदमी में अपना काम के प्रति उत्साह आ अपना मेहनत पर विश्वास कइल जरुरी बा. जदी केहू में ई दुगो चीज बा त आदमी असफल ना हो सकेला.

सन् १९८८ में टाइल्स निरमान के काम जब चौबे जी लखनऊ में शुरु कइनी त सभे हसत रहे. बाकिर इहॉ के कबो ए॓ बात से विचलित ना भइनी कि के का कहत बा?

इहाँ के आपन कान बहिर आ पीठ गहिर कइले अपना धुन में लागल रहनीं. शुरु-शुरु में इहाँ के बहुत संघर्ष करेके पड़ल. बाकिर इहाँ के लगन आ मेहनत एक दिन आपन रंग देखावल शुरु कइलस.

ओही घरी लखनऊ में संजय गाँधी स्नातकोत्तर संस्थान बनत रहे त चौबे जी के ओजा के काम मिल गइल. बस तबहीं से एक्लेट टाइल्स जवन स्पीड पकड़लस उ आजु ले कामयाब बा.

रोहतास जिला बिहार के बभनौल गाँव क रहे वाला श्री ओ.पी.चौबे के बाबुजी डॉ.राधिका रमन चौबे प्रतिष्ठित होम्योपैथिक डाक्टर आ प्रगतिशील किसान रहनीं.

डाक्टर साहब के बेवहार आ राजनीतिक पैठ के कारन ओ जवार में ऊहाँ के नाम बहुते सम्मान से लिहल जात रहे.

श्री ओ.पी.चौबे से जब पूछल गइल कि ऊ टाइल्स निरमान खातिर लखनऊ का सोंच के अइनीं? त चौबे जी के कहनाम रहे कि ऊ खाली टाइल्स के फैक्टरी लगावे खातिर लखनऊ ना अइलन. बलुक उनकर पढ़ाई-लिखाई सब कुछ लखनऊवे में भइल बा.

इहाँ के कहानी कि हम त बिहार से लखनऊ पढ़े खातिर आइल रहनी बाकिर ईहाँ के वातावरन हमरा बढ़िया लागल बस एही से लखनऊवे में हम आपन काम शुरु कर देनी.

ऊहाँ के इहो बतउनी कि पटना में भी एगो टाइल्स बनावे के फैक्टरी बा. जे हमार बड़ भाई श्री बशिष्ठ नारायण चौबे चलावेलन.

चौबे जी के अपना टाइल्स क गुणवत्ता पर बहुते भरोसा बा. चौबे जी कहनीं कि हमरा सामने लखनऊ में दस गो फैक्टरी खुलली स आ क्वालिटी ना दे पउला का वजह से बन्द हो गइली स.

इहाँ के साफ कहनाम बा कि एक्लेट टाइल्स के पहिचान बाजार में अपना गुनवत्ता के कारन बा.

शुरु में खाली फ्लोर टाइल्स के निरमान करे वाला एक्लेट टाइल्स कम्पनी अब मोजेक टाइल्स, इन्टरलाकिंग पेवर्स, चेकर्स टाइल्स आ डिजाइनर पेवर्स भी बनावल शुरु कर देले बिया.

आजु अधिका सरकारी प्रतिष्ठित भवनन पर एक्लेट टाइल्स कम्पनी के बनल टाइल्स चमकत बिया.

व्यवसायिक ईच्छाशकि्त से मजबूत ओ.पी.चौबे जी क समाजिक आ धार्मिक क्षेत्र में भी दखल बा.

चौबे जी रोटरी क्लब, लखनऊ से जुडल बानी आ अध्यक्ष पद के बढ़िया दायित्व निभउला के कारन डिस्ट्रिक अवार्ड फार बेस्ट प्रेसीडेन्ट से सम्मानित भी हो चुकल बानी.

आपन बोली भोजपुरी से त चौबे के लगाव देखते बनेला. भोजपुरी के बारे में चौबे जी कहनीं-"भोजपुरी लोगन से मिलके हमरा बहुत आछा लागेला. मिलला पर अइसन बुझाला कि जइसे हम अपना कुटुम्ब में बइठल बानी. साँच पूछीं त आपन बोली बोलला में अपनापन त होइबे करेला अउर असीम सुख भी मिलेला. हमार बाबुजी बतावत रहनीं कि देश के पहिलका राष्ट्रपति डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद भी आपन भोजपुरियन से अपने बोली में बतिआवत रहनीं ह.

ऊहाँ के सामने जदी केहू भोजपुरिया आदमी दोसरा बोली में बोल दे रहे त ऊहाँ के अच्छा ना लागत रहे." श्री ओ.पी.चौबे जी के कहनाम बा कि आपन भोजपुरी खूब आगे बढ़े आ तरक्की करे. चौबे जी कहनी कि भोजपुरी के जहिया भाषा के दरजा मिली त उ दिन भोजपुरियन खातिर एगो परब खानी होखी. आपन भाषा आ आपन व्यवसाय के साथे पूरा ईमानदारी से समर्पित श्री चौबे जी के एक्लेट टाइल्स भी देश के सरकारी भवनन पर मजबूत इरादा के साथ चमकत बाडी़ सन.

एक्लेट टाइल्स लागल सुसज्जित भवन- हवाई अड्डा-पटना, इटावा, पलिया. होटल मौर्या, रिपब्लिक, पाटलिपुत्र अशोक-पटना, होटल क्लार्क्स अवध-लखनऊ, नारायनी होटल-काठमांडू, गोल्फ क्लब-पटना आ लखनऊ,आचार्य नरेन्द्र देव कृषि विश्वविधालय-फैजाबाद, बापू भवन आफिस काम्पलेक्स-लखनऊ, अमेरिकन अम्बेसी-काठमांडू, मुख्यमंत्री उ‌‍‍‍‍.प्र.,लखनऊ के अतिथि आवास, विकास भवन-शाहजहाँपुर,न्यायालय भवन-इलाहाबाद,स्पोर्ट्स कालेज-लखनऊ आ चाणक्य सिनेमा हाल-पटना एगो बानगी बा.