लिलार मत फोडीं

आशा श्रीवास्तव

सांझि खा रमाशंकर दुबे जब आपन नौकरी बजा के घरे अइले त देखले कि दुनू लड़िका भूखे मरुआईल बिलखत बाड़न सऽ. लइकवन से दुबे पूछबो कइलन कि तोर माई कहवाँ बिया. त नन्हका बतउलस कि ओ कोठरी में सुतल बिया. दुबे उनकरा के खोजत ओ कोठरी में गइलन त देखलन कि उनकर मेहरारु चिते कोप भवन लेखा पटाईल बिया. दुबे पूछलन-का मलकीनीं का बात हऽ कि तू पटाईल बाडू आ लईका भूखे बिलखत बाड़न सन? उनकर मेहरारु ऐह बात के कउनो जबाब ना दहेली. रमाशंकर दोबारा पूछलन बाकिर उनकर मलकीनीं तबहूँ कउनो जबाब ना देली.

रमाशंकर कारन जाने के गरज से फेरु लड़िकन के लगे लउट अईलन आ लड़िकन से पूछलन कि का बात है कि तोनी के मतारी सुतल बिया? उनकर मन ठीक बा नू? बाकिर लइकनो सन ऐह बात के कउनो जबाब ना दे पउले सन. दुबे बड़ा अंसमंजस मे पड़ि गईले कि आखिर का बात बा ग? मलकीनी के तबीयत त नईखे गड़बड़ा गईल. ऊ जब सबेरे घर से अपना नोकरी पर गईले त ओ घरी मलकीनीं ठीके-ठाक रहली.लड़िका सन भी नास्ता पानी करके स्कुल गईले सऽ.आ दुबे भी खा पी के अउर आपन टिफिन लेके नौकरी पर गईलन.बाकिर घरे अईला पर सब नजारा बदलल रहे.

अपना काम पर से थाकल-खेदाइल लउटला पर दुबे के संसा होखे लागल! उ फेरु अपना मलकीनीं के लगे ओ कोठरी में गईलन आ मलकीनीं से पूछलन कि का बात ह मन त बाउर नईखे,तबीयत नीमन बा नू!बाकिर अबहुओ उनकर मेहरारु कउनो जबाब ना देली.बलूक दुबे के कनखिया के देखि के छाव करके करवट बदलि के कॉछ लेली.अपना मेहरारु के अईसन बेवहार से दुबे बूझ गईलन कि उनकर तबीयत नईखे खराब.उ कउनो बाति के लेके काछले बिआ.दुबे आपन मन अस्थिर करेके चाहत रहले.बाकिर उनकर मन अस्थिर ना होत रहे.ऊ नोकरी से लउटला के बाद घर के ई नजारा देखि के परेशान रहलन.ऊ आपन हाथ मुहँ धो के सीधे रसोई में लड़िकन खातिर नास्ता पानी बनावे पहुँच गईलन.रसोई में दुबे लड़िकन खातिर नास्ता पानी बनउलन,दुनू के खिअवलन.ओकनी के चुप करउलन.बाकिर उनकर दिमाग बड़ा परेशान रहे कि आखिर कउना बात के चलते उनकर मेहरारु नखरा पसरले बिया? उ दोबारा लड़िकन से जाने के चहलन कि आखिर कवन अईसन बात हो गईल कि उनकर मेहरारु पड़ल बिया? बाकिर दुनू के कुछु ना पता रहे से उनकरा कउनो कारन के घर में बखेड़ा देखि के दुबे के खीस बढ़ गईल आ उ ओही खीसी फेरु अपना मेहरारु के लगे गईलन.फेरु मेहरारु से पूछलन कि आखिर का बात है ते कुछु बोलबे तबे न हम जानब.बाकिर एहू पर उनकर मेहरारु कउनो जबाब ना देली त दुबे के पारा आपा से बाहर हो गइल.ऊ खीसे अपना मेहरारु के दु थापर मारि देहलन.उनकरा छापर पड़ते घर में उनकर मेहरारु कोहराम मचा देहलस.कोहराम सुनि के दुबे के घर अगल-बगल के लोग भी जुट गईल.लोग दुबे के समझावे लागल कि तहरा मेहरारु पर हाथ ना छोडे़ के चाही.केहू कहे कि दुबे तू ई बात गलत कईलऽ.त केहू पूछे कि आखिर अईसन का नउबत आ गईल कि तू मेहरारु के पीटे लगलऽ?

दुबे के लगे कउनो जबाब होखे तब नू बतावस.उ लोग के पूछला पर ईहे कहस कि ओकरे से पूछी सभे कि का बात ह.थोहडी़ देर मे बीच-बचाव करि के लोग बाग चल गइल.मामला शांत हो गइल.ऐही बिच एक दू गो अगल-बगल के औरत जे बीच बचाव करे आईल रही स.ऊहो दुबेके मेहरारु से जाने के कोशिश कइल कि आखिर कउना बाति पर दुबे ऐतना खिसिआ गईलन.बाकिर उनकर मेहरारु कउनो कारन ना बतउली.

लोग के बडा़ ताज्जुब होत रहे कि अपना मेहरारु के ऐतना माने वाला दुबे के आज का हो गईल.केहू कहे कि दुबे आ उनकरा मेहरारु के बीच कउनो बड़हन बात बा,तबइहे ऐतना हंगामा भईल हऽ.दस गो मुँह से दस गो बात निकले लागल.

ई बात त सॉच ह कि दुबे के ए मेहरारु से दोसर बिआह भईला लगभग चार बरिस होत होखी बाकिर कब्बो दुबे अपना मेहरारु से जोर से ना बोलले रहस.दुबे पहिलकी मेहरारु के मरला के दू बरिस बाद दोसर बिआह कइले रहलन.पहिलकी मेहरारु से दुबे के एगो बेटी आ बेटा बा.बाकिर दुबे के मेहरारु भी आजु ले दुनू लड़िकन के सउतेला ना बूझली.ऊ लड़िकन के अपना लड़िकन खानी पूरा मान दान करेली.उनकर ई बेवहार से त पूरा मोहल्ला हायफ रहेला.सभे कहेला कि लड़िकन के दोसर महतारी में कउनो अन्तर ना बूझाला.एही से रामशंकर दुबे बहुत निसचिन्त रहेलन कि चलऽ दोसर बियाह कईला से छोट-छोट लड़िकन के महतारी के ममता मिल गईल.बाकिर आजु के घटना से दुबे बहुते आहत रहन.उन्हुके मन में हाथ छोड़े के पछतावा त होते रहे.बलुक मामला शांत भईला पर ऊहे बेचारु अपना मेहरारु से कहलन कि आजु जवन हो गईल हऽ ई ना होखे के चाही.बाकिर का करीं खींस बढ़ गईल हऽ.

दुबे के बात सुनि के उनकरा मेहरारुओ के बुझाईल कि गलती उनकरे बा.ऊहो ऐह बात के मनली कि हमरा रुसला के कारन बतावे के चाहीं.

ऊ आपन रुसला के कारन बतवली कि मोहल्ला में राजकरन के माई एगो नया साड़ी किनले बाड़ी.ऊ साड़ी उ दू दिन पहिले दुबे के देखउली आ उनकरा से कहली कि अईसने एगो हमरो साड़ी चाहीं.त ओही दिन दुबे अपना मेहरारु के समझउले कि अबहीं दू चार दिन भईल हम फैक्टरी से करजा लेके तहरा खातिर चार गो सोना के कंगन बीस हजार में बनवउनी ह.तू ई चार सौ के साड़ी के फेर में मत पड़ऽ.कहिओ कींन देब.

ऊ अपना मेहरारु से ईहो कहले रहन कि दोसरा के माँग लाल देखि के आपन लिलार ना फोड़े के चाहीं.आपन खरचा अपना आमदनी ले हिसाब से करेके चाहीं ना त परिवार ठीक से ना चल पावेला.बाकिर उनकरा मेहरारु के इ बात ओह दिन समझि में ना आईल .ऊ ओही साड़ी खातिर रुसल आ बात एतना आगे बढ़ गईल.

अईसहीं राकेश नया-नया बियाह करके अईलन.अबहीं ऊ बियाह के खर-खरचा से उबरियो ना पउलन तबले उनकर मेहरारु कार कींने के फरमाइश कर दिहलस.राकेश के अपना मेहरारु के अपना स्थिति के बारे में बतावे के चाहीं.बाकिर ऊ अइसन ना कइलन.बिआह के नया-नया लढ़क रहे से मेहरारु के कहला पर कहीं से लोन के व्यवस्था कइलन आ कार कींन लेलन.ऊ केहूंगो एके दू महीना कार के किश्त सधा पउले होइअन.अब उनकरा कार जोश में कींन लेला के पछतावा होखे लागल.उ बेचारु ओही चिन्ता में घुले लगलन.नतीजा ई भईल कि ऊ कार के एक दूगो किश्त ना दे सकलन.

एक दिन ऊ अपना मेहरारु के साथे कार से केहू किहाँ बिआह में सज-धज के जात रहलन त रास्ते में बैंक वाला उ दुनु लोग के कार से उतार के कार जब्त कर लेहलस.ओहदिन राकेश के मुहँ देखे लायक रहे.राकेश बेइज्जती के घूँट पीके मेहरारु के साथे घरे लउट अइलन आ बिआह में ना गईलन.

रमाशंकर दुबे आ राकेश के घटना त बस एगो बानगी भर ह.अईसन कईला से आखिर का फायदा? ये घटना से सीख लेवे के चाहीं कि हमेशा आदमी के आपन चादर देखि के गोड़ पसारे के चाहीं.ना त शान बघारे के फेरा में इज्जत गवँउला से कउनो फायदा नईखे. हालांकि आजु के समाज में जल्दी आगे बढ़ला के कोशिश में अईसने घटना घट रहल बाड़ी सऽ.बाकिर लोग शान खातिर कुछुओ करेके तईयार बा.लोगन में सन्तुष्टि के भाव ओराइल जात बा.जवन कि खुशहाल जिनगी खातिर बाउर लछन हऽ.रामशंकर दुबे के इ कहनाम कि उनकर माँग लाल देखि के आपन लीलार फोडला के जरुरत नईखे सोरहों आना साँच बा.